
तू फ़ासलों की कद्र कर
उठ ! ये जंग की पुकार है
वक़्त कर रहा प्रहार है
नज़दीकियों की शक़्ल में
वो काल पे सवार है ।
ज़मीर से तू जुड़ ज़रा
सियासत का दाव छोड़ दे
मौत की कतार से हट
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तू फ़ासलों की कद्र कर
उठ ! ये जंग की पुकार है
वक़्त कर रहा प्रहार है
नज़दीकियों की शक़्ल में
वो काल पे सवार है ।
ज़मीर से तू जुड़ ज़रा
सियासत का दाव छोड़ दे
मौत की कतार से हट