तू फ़ासलों की कद्र कर's image
699K

तू फ़ासलों की कद्र कर




तू फ़ासलों की कद्र कर


उठ ! ये जंग की पुकार है

वक़्त कर रहा प्रहार है

नज़दीकियों की शक़्ल में

वो काल पे सवार है ।


ज़मीर से तू जुड़ ज़रा

सियासत का दाव छोड़ दे

मौत की कतार से हट

Tag: poetry और30 अन्य
Read More! Earn More! Learn More!