
तासीर सफ़र-ए-ज़िंदगी की, अजब है बेबार
हर मुक़ाम पे मंज़िल की, भला राहतें कहाँ
दिल ढूँढता है भटकने की रोज़ नई तरक़ीब
आज निकले रस्ते यहाँ, न जाने कल कहाँ
-प्रशान्त बेबार



तासीर सफ़र-ए-ज़िंदगी की, अजब है बेबार
हर मुक़ाम पे मंज़िल की, भला राहतें कहाँ
दिल ढूँढता है भटकने की रोज़ नई तरक़ीब
आज निकले रस्ते यहाँ, न जाने कल कहाँ
-प्रशान्त बेबार