
सामने तेरे तकिये पे, टिक के रात भर
पूरी पूरी रात इकटक सुनता जाऊँ तुझे
हथेली पे सेकी सारी रात जो बैरन नींद
सुबह माथे पे सजाके ऐसे सुलाऊँ तुझे
- प्रशान्त बेबार



सामने तेरे तकिये पे, टिक के रात भर
पूरी पूरी रात इकटक सुनता जाऊँ तुझे
हथेली पे सेकी सारी रात जो बैरन नींद
सुबह माथे पे सजाके ऐसे सुलाऊँ तुझे
- प्रशान्त बेबार