राखी इस बार......


हमारे बचपन की अल्बम अपनी आँखों में लिए

शिकायत और प्यार भरे क़िस्से बातों में लिए

बहन, इस बार तुम सुबह से न मेरी राह ताकना

राखी के दिन मैं कहाँ रह गया, घड़ी घड़ी न झाँकना


तुम्हारी रक्षा का वादा है, वो वादा निभा रहा हूँ

इस साल, दूरियों में हिफ़ाज़त है, मन को समझा रहा हूँ

राखी तो तुम्हारी पहुँच गयी,

मगर तुम अपनी हँसी रखना भूल गयीं

रोली-चावल भी सजेंगे माथे

पर तुम अपनी छुवन रखना भूल गयीं


अपने पैर छुलवाने की ज़िद पे

इस बार, मुझे चिढ़ा न पाओगी

मैं जब ख़ुद ही अपना टीका करूँगा

सच बहन, तुम बहुत याद आओगी


इस साल, घेवर और मिठाई में मीठा ज़रा कम है

वीडियो कॉल पे हँसती हो, पर आँखें क्यूँ नम हैं

चलो इस बार टीवी रिमोट पे अपना हक़ जमा लेना

और मेरे हिस्से की सेवइयां भी तुम ही खा लेना


इस साल, वो नादानियाँ बहुत याद आएँगी

इस साल, ये दूरियाँ रह-रह के सताएँगी

इस साल हमारे शहर का रस्ता झगड़ता है

आसमान का मालिक ख़ुद को क्या समझता है

मिलके मंदिर से जो हमने अठन्नी चुराई थी

उस बात से अब तक चिढा सा लगता है


जो भी हो बहन, तुम याद-ओ-फ़िक़्र मत करना

घर में मेरी बातों का, ज़्यादा ज़िक्र मत करना

फ़्रिज में से अपनी फ़ेवरेट चॉकलेट खा लेना

गिफ़्ट जो भी वसूलने हैं, लंबी लिस्ट बना लेना


हम जब मिलेंगे, ये कच्चे लम्हे पकाएँगे

मिलके सब लोगों की नक़ल बनाएँगे

बहना, ये प्यार किसी एक दिन का नहीं

मिलने पे सबको दिखा देना

मिलना तो कलाई पे मेरी, हाथों से अपने

क़िस्मत सजा देना।