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मैं हूँ ठंडी छाँव अगर


मैं हूँ ठंडी छाँव अगरतो वो है जाड़े की धूप

मैं हूँ सागर अगरतो वो है नदी का रूप

जिस दिन ये नदी और सागर मिल जाएँगेसमझना, स्वर्ग बिक जाएँगे

— प्रशान्त बेबार
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