करमसुनी है किसने वो रातों की सरगोशीवो तारों की झिलमिल किसने सुनी हैन है कहीं जन्नत, न है नरक का रस्ताजो है वो यहाँ है ; हाँ यहीं है, यहीं है ।
करम
सुनी है किसने वो रातों की सरगोशीवो तारों की झिलमिल किसने सुनी हैन है कहीं जन्नत, न है नरक का रस्ताजो है वो यहाँ है ; हाँ यहीं है, यहीं है ।