हाफ़ वाइफ़ : Half Wife
अरे जाना!
ये किस ज़माने में आकर मिले हो,
जहां क़त्ल मंजूर है पर इश्क़ नहीं,
खुदखुशी मंजूर है, पर ख़ुदी नहीं।
सुना है पूरी शब तुम्हारी बैठक में, कल 'फ़ोटो' दिखाया गया
आज फ़िर कोई नामुराद मेरे हिस्से की रातें खा गया।
पूरे इश्क़ की शिद्दत पूरी थी, शायद लकीरें आधी रह गयीं,
आधी आधी लकीरों में तुझे ढूंढते, रात पूरी गुज़र गयी।
मुझे इल्म है कि ज़माने के कायदे क्या हैं,
क्या हैं इनके तौर तरीके,
पर मेरे कुछ सवाल हैं, जो ख़ुद आधे अधूरे हैं ।
क्या मेरी तरह मेरा एहसास भी आधा रह जायेगा,
ख़्वाब जो बुना पूरी पूरी रात, वो भी क्या आधा हो जायेगा?
कहो ना! क्या मेरी रातें, मेरी सुबह भी आधी हो जायेगी
हमारी पूरी कहानी वाली बात भी क्या, अधूरी रह जायेगी?
खैर यह बताओ,
उन सलवटों का क्या, उन करवटों का क्या
जब आधे आधे से हम दोनों, इक पूरे पूरे बनते थे
ख़ामोशी जो बोलती थी हमारे बीच,
वो भी हमारे रिश्ते सी, क्या आधी चुप चुप सी रह जायेगी?
वो तेरे चेहरे का लम्म्स, तेरी एक एक सांस
मेरी बेसबब बेचैनियाँ, मेरी तुझसे रक्खी आस
वो भी आधी सी ही रह जाएगी क्या ?
बिल्कुल मेरी तरह, बस मेरी तरह।
मुझे मालूम है तुम काफ़िर नहीं,
ख़्वाबों पे देर तलक टिक के सोना भी तो मुमकिन नहीं
तुम्हें ग़लत-फ़हमी है कि मैं इस वबाल से परेशान हूं,
बस माथे पे सिंदूर कहां तक खींचूं, मैं इस बात से हैरान हूं।
बस माथे पे सिंदूर कहां तक खींचूं, मैं इस बात से हैरान हूं।
~ प्रशान्त बेबार'


