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Antarhman ki Vaani - A tale about Father and Daughter | अंतर्मन की वाणी



अंतर्मन की वाणी


चमक भरी बड़ी शैतान आंखें, मासूम सी एक नन्हीं जान

ख़ुदा की रहमत हो, या ख़ुद खुदा का छोटा रूप हो तुम

सारा दिन जो फ़िक्र ए दुनिया में बेहिसाब सर खपाता हूँ मैं

दौड़ के पास आ,सब वबालों से मुझे आज़ाद करती हो तुम।


रोज़ शाम जब मेरी बड़ी उंगली पकड़ सैर पे जाती हो

छोटे छोटे ल्वजों से कितनी बात बनाती हो

तितली को पकड़ो या गिलहरी के पीछे भागो,

उन सब में भी सबसे छोटी नज़र आती हो ।


ज़रा भी यक़ीन

Tag: poetry और3 अन्य
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