ये जो तस्वीरें हैं आसमां में तरह तरह की
बादलों में कई रंग और रूप दिखते हैं
कभी फ़ुर्सत से बैठना मुंडेर को साहिल समझ के
अक्सर ये बादल एक कहानी कहते हैं ।
किसी की छोटी उंगली पकड़,
गर जो देखो इनको
तो कभी बिल्ली, कभी घोड़ा,
कोई हाथी या ड्रैगन के
न जाने कितने चेहरे-मोहरे बनते रहते हैं
यूँ तो घड़ियों में समाता नहीं ये आसमां अब
पर जो कभी सिग्नल पे खड़े खड़े,
एक नज़र चली जाए
तो ग़ौर करना,
घुमड़ते बादल टकटकी लगा हमें देखते रहते हैं
अक्सर ये बादल एक कहानी कहते हैं।
कभी कभी गुड़िया गुड्डे का सा पूरा घर नज़र आता है
हस्ता खेलता नीला आसमां आंखों में उतर आता है
कुछ छोटे नन्हे बादल तो पोता-पोती लगते हैं
ऊपर जो आएं मेरे, तो आँचल सा ढांक लेता हूं चेहरे पे
यूं कि जैसे ओढ़ लिया हो सारा आसमां मैंने
फिर पूंछ और सूंड वाले बादल मेरे संग खेला करते हैं
कभी तेज़ पुरवैया हवा, जो उखाड़ती है पुराने दर्द
चल जाए, तो झकझोर देती है सारी तस्वीरों को
बादल की नाव जिस पर मैं अमृत पी के बैठा था
घुल जाती है दूर अनंत में कहीं
चिड़िया की आंखें जो चमकती थीं बादल में
अब मुँद जाती है, जैसे वहां थी ही नहीं
क्यों ये सब इतनी जल्दी में रहते हैं,
अक्सर ये बादल एक कहानी कहते हैं।
अक्सर ये बादल एक कहानी कहते हैं।


