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कविता


प्रेमपत्र प्रेम का प्रेम के पृष्ठ पर कैसे लिखूँ प्रियेकी मैं हूँ आज के युग का तुम भी हो आज के युग की

कैसे अलंकृत कर दूँ चाँद को तुम्हारे आँचल में मैंअब ना वो दामन रहा ना तस्वीर वो कुदरत की

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