या अल्लाह

इस ईद मेरी दुआ क़बूल कर ।

अब सब्र नहीं बचा है मुझमे

तू आ और मेरा हिसाब कर

कौन करेगा क़ब्र में इंतज़ार

दिन ए क़यामत का

दे फ़रमान फ़रिश्तों को

मेरे जीते जीं, 

मेरे कर्मों का हिसाब कर।

 

ए खुदा 

और मेरे सब्र का इम्तिहान ना ले

गिन मेरे हर गुनाह को 

मुझे दोज़ख़ की आग दे

ग़र किया कोई काम नेक मैंने

मुझे जन्नत के सुकुँ से अता कर

अता कर हूरों का हरम, शराबों का समंदर

इतर वाली हवायें और रुहानी सुक़ू


मेरे मालिक मेरे मौला

तू भेज फ़रिशतों को

और मेरा हिसाब कर


या फिर भेज पैग़म्बर को 

देकर अपना फ़रमान नया

“ग़र करे कोई गुनाह अगर 

कर दिन मुक़र्रर उसका

दे फ़ैसला उसी वक़्त

न इंतज़ार कर क़यामत तक”

या खुदा 

क़बूल कर मेरी दुआए

या, आ और मेरा हिसाब कर।


# दुआ