आदिम मानव से लघु मानव तक
सारी कहानी भूख है।
सूरज का होना भूख है
धरती का तपना भूख है
हवाओं का बहना भूख है
बदलों का गर्जना भूख है
बारिश का होना भूख है
फ़सलो का लहलहाना भूख है।
कल कारख़ाना का लगना भूख है
शहरों का बसना भूख है
गाँवो से शहर आना भूख है
कल कारख़ानो का बंद पड़ना भूख है
शहरों का मर जाना भूख है
शहरों से गाँव लौट आना भूख है
भूख ही लेकर आती है
भूख ही लेकर जाती है
पटरियों का दौड़ना भूख है
रास्तों का रुक जाना भूख है
मुसाफ़िर का सफ़र में होना भूख है
मुसाफ़िर का ना होना भी भूख है
हर सफ़र भूख है हर मंज़िल भूख है
जिधर देखो उधर भूख है
हर बग़ल भूख के क़िस्से है
हर बग़ल भूख की कहानियाँ
हर हाथ ख़ाली है हर मुँह भूखा है
भूख ने सबकुछ लील लिया है
क्या धरती क्या आसमान
भूख बढ़ती ही जा रही है ।
ज्ञान अधूरा है विज्ञान बेचारा है
क्यूँकि मानवता हारी हैं
जो भरता है पेट भूख का
वो दो मुट्टी अन्न पे हारा है
कब बनेगे हम विकसित
कैसे होगी सदी हमारी
कब बनेंगे विश्वगुरु
कैसे पाएँगे विजय भूख पे
औ भारत भाग्य विधाता सुनो
करोनो आज है कल नहीं होगा
अमरत्व नहीं मिला है उसे
चला जाएगा सदा के लिए
या फिर रह जाएगा सदा के लिए
साथ उसके, हम जीना सिख लेगें
पर जो ज़ख़्म तुमने दिए
छप गए है दिल पे हमारे
छोड़ दिया हमें कर दर बदर
घुस गये तुम महल में अपने
पर भूल गए हो तुम
पुश्तैनी घर नहीं है तुम्हारा
जिसको हमने चुना है
राजा वही बना है
प्रजातंत्र का वही प्रहरी
खड़ा मिलें जो भर दोपहरी
तुमसे पहले भी चुना था
तुम्हारे बाद भी चुनेंगे
पर याद रखना
तुमसा नहीं चुनेंगे


