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शिव सुमिरण

जन्म और मरण का एक ही दाता ,

तेरी व्याख्या निस दिन गाता।

काशी का मतवाला पिए भंग का प्याला ,

ललाट चंद्र त्रिपुंड धारी विश्वरूप निराला ।

वाघमबर धारे , त्रिशूल तिहारे , गले बीच मुंड माल ,

तीन नेत्र , कंठ भुजंग , मणि महेश रूप विकराल ।

उमा पति शंभू त्रिलोकनाथनमः शिखर कैलाश विराजे,

अहंकार का कर विनाश तेरे कर से डमरू बाजे ।

महादेवा आदि अनंत कौन जानेगा तेरा भेद ,

चंद्रशेखर की वाणी को कहते सब गण

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