अब जब ना चैन मिलता हैं, हमे तब चैन मिलता है, बेघर बेकरार रहने की, आदत मिली है हमको, मर जाते है लोग जब, रुह को सुकून मिलता है, जिते हुए भी मरने जैसी, शहादत मिली है हमको, हमने घरबार जो छोड़ा, कहानियों की तलाश मे, और खुद कहानी बन गए, इत्मिनान से पड़ेगा कोई, तब राहत मिलेगी हमको।