प्रेम निःशब्द है
मासूम है
निश्चल है।
प्यार न खोना है
प्यार न पाना है
प्यार तो बस एहसास है
जिसके तार दिल के बेहद पास है।
प्यार तो वो दरिया है
जो खुश्बू बिखेरती है,
प्यार करुणा रूपी धारा का
तपती रेत पर शीतल स्पर्श है।
प्यार एक्सरे जैसा है
जो फांद जाता मजबूत दीवारें
प्यार बुलेट ट्रेन है
जो दौड़ता है रफ़्तार सा
प्यार राकेट भी है
जो चीर देता आसमाँ भी।
प्रेम खोल देता है
सालों पुरानी बेड़ियां भी
पर प्रेम छलता नहीं, लुटता नहीं
ठग बन कर कभी।
बस लुटाता है आंखें मूंद कर
कुदरत की तरह
अपना दिल
अपनी रूह
अपनी सांसे भी ।


