जिस्म से रूह भी आज़ाद होती है
हर चीज़ की अपनी मीयाद होती है
कभी एक लम्हे की जल्दबाज़ी से
कई सदियां बरबाद होती है
झुका के आसमाँ वो बना ले रस्ता
जिसकी हिम्मत फ़ौलाद होती है
~निमित्त निर्मूल


जिस्म से रूह भी आज़ाद होती है
हर चीज़ की अपनी मीयाद होती है
कभी एक लम्हे की जल्दबाज़ी से
कई सदियां बरबाद होती है
झुका के आसमाँ वो बना ले रस्ता
जिसकी हिम्मत फ़ौलाद होती है
~निमित्त निर्मूल