कमजोरों पे आग उगलती आयी है
ये दुनिया तो यूँ ही चलती आयी है
एक अकेली शाम नही ढलती यारों
हर साये की उमर भी ढलती आयी है
रंग-बिरंगे पंखों से गुलशन गुलशन
हमें सियासी तितली छलती आयी है
~निमित्त निर्मूल


कमजोरों पे आग उगलती आयी है
ये दुनिया तो यूँ ही चलती आयी है
एक अकेली शाम नही ढलती यारों
हर साये की उमर भी ढलती आयी है
रंग-बिरंगे पंखों से गुलशन गुलशन
हमें सियासी तितली छलती आयी है
~निमित्त निर्मूल