जब जल रहा है मन तेरा तो क्या युवा और क्या जवानी
आंख बूंदों में है डूबी, खुद पोंछकर बनज़ा निशानी
कर प्रफुल्लित आत्ममंथन,संदेह की किसने है जानी
उत्कृष्ट कर्ता कर्म करते,नहीं सोचते कल की कहानी
अभी शौर्य ओजस वीरता में बंधन बड़ा ही श्रेष्ठ सा है
उगते हुए सूरज के आगे नतमस्तक है ये दुनिया दीवानी
जब जल रहा है मन तेरा तो क्या युवा.......
बालेन्द्र शर्मा

