ग़ज़ल हो या कलम से बस,दास्ताँ सुन लो

कोई डूबा किसी के हिज़्र में,उससे वास्ता सुन लो

सुन लो हमारी बन्दगी,जिसके लिए जीते हैं हम

कैसा है रात से दिन का सफर वो रास्ता सुन लो

ग़ज़ल हो या कलम.....

बालेन्द्र शर्मा