एक टंकार है
रूढ़ियों के दमन की
लगता.....ये हुंकार है
बुद्धि प्रकाशित
चच्छु ललायित
लघु सोच होती नष्ट
ओछी बेड़ियों का संघार है
बालेन्द्र शर्मा


एक टंकार है
रूढ़ियों के दमन की
लगता.....ये हुंकार है
बुद्धि प्रकाशित
चच्छु ललायित
लघु सोच होती नष्ट
ओछी बेड़ियों का संघार है
बालेन्द्र शर्मा