गर बुराई का स्वरुप भीष्म है 

वो,दबते कुचलते लोगों की आवाज है


इस राष्ट्र नारी शक्ति का वो 'दम्भ' है

जो पूर्ण खुद में हो स्वतंत्र,वो 'स्वराज' है

कम्पित नही तू श्रेष्ठ है

महासभा बताती वो मिशाल है

तेरे विचारों की धरा अमर हुयी

क्योकि आने वाला कल भी तेरा आज है

गर बुराई का स्वरुप भीष्म है,वो......

बालेंद्र शर्मा