सारी करतूतों के जिम्मेदार
खद्दर में लिपटे बैठे हैं
वो जो हल लिए,हर सवाल का
पेट की बूख और माँ के लाल का
छोड़ ठिकाने खेतों के
अब सड़कों पर रहते हैं
जो झड़प हुई,खादी का क्या
ख़ाकी जान लगा देगी
अपने अपनों को मारेंगें
खादी अपना काम बना लेगी
उनको न दिखता रोता समाज
वो सिंहासन पर ऐंठे हैं
सारी करतूतों के.......
~बालेन्द्र शर्मा

