प्यार का ख़्वाब's image

मैं खोया था सपनों में उसकी मुस्कान लेकरके

देखकर चेहरा ख़ुशी में सो रहा था

वो कब आई धीरे कदमों से प्यार का सॉल लेकरके

इसका पता मुझको नहीं मैं तो बस खो रहा था

होगी रात की जुदाई सुबह से इस बात का अफ़सोस हो रहा था

अभी इतना ही न था ख़्वाब में,सुबह की बात कुछ यूँ थी

पिता की लात पर फ्री एक प्रश्न था

अभी

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