हे प्रेम प्रिय,

        निज आँखों में,तेरी बिसरी सी याद रही,तुम भूल गए,हम याद करें, जिससे दुनिया बर्बाद रही,तुम कहो हमारी आँखों से,

न यूँ इतनी बरसात करो,छोडो तुम सारी विरह व्यथा,न दिल से दिल की बात करो,यह प्रेम रूप की माया है,जो दो दिन में ढल जायेगी,

स्वीकार करो अब याद हमारी तुम्हे कभी न आएगी,

फिर मैं समझा लूंगा नयनों को,ये गीत आंसू के न गाओ,मज़बूरी समझो इस दिल की, बस एक बार तुम आ जाओ

बस एक बार तुम आ जाओ...

                    पूर्व की चाहत-बालेन्द्र शर्मा

दिनांक-06/10/2020