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फूल कांटे


फूल कांटे इन सब की बातें व्यर्थ हैं

बात प्रेम की हो तो कोई अर्थ है

गर प्रेम हैतो न शिकायत है और न कोई गिला

प्रेम वो ही करे जिसमे दुखों का सामर्थ्य है

फूल कांटे.....

— बालेन्द्र शर्मा
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