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पर्दानशीं


अभी तो रूह ने पर्दा किया था ज़िस्म छोड़करहमारे सामने ज़्यादा पसंद था,

तुम्हें पर्दा नसीं होनाऔर अब आये हो मेरे दर्द के किस्से को जानने

पर्दा नसीं नहीं हो,अब हमको नहीं पसन्दन पर्दा नसीं होना

— बालेन्द्र शर्मा
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