निगाहों के खेल में
अक्शर दिल हार जाता है
'मोहोब्बत' शौक है जिनका,
बाजी मार जाता है|
यहां तो दिल लगी में,
खुशियाँ भी उनके नाम करते हैं
'दिये' उनके ग़मों को
खुद सहेजे मुस्कराता है||
बालेन्द्र शर्मा


निगाहों के खेल में
अक्शर दिल हार जाता है
'मोहोब्बत' शौक है जिनका,
बाजी मार जाता है|
यहां तो दिल लगी में,
खुशियाँ भी उनके नाम करते हैं
'दिये' उनके ग़मों को
खुद सहेजे मुस्कराता है||
बालेन्द्र शर्मा