किनारों का क्या है,यूँ खड़े ही रहेंगे
नदी का इश्क़ छलके वो,पड़े ही रहेंगे
कहना क्या,उफानें बस मोहोब्बत की उठा देना
वो इस प्यार की ठंडक में जले ही रहेंगे
किनारों का क्या है.....
बालेन्द्र शर्मा


किनारों का क्या है,यूँ खड़े ही रहेंगे
नदी का इश्क़ छलके वो,पड़े ही रहेंगे
कहना क्या,उफानें बस मोहोब्बत की उठा देना
वो इस प्यार की ठंडक में जले ही रहेंगे
किनारों का क्या है.....
बालेन्द्र शर्मा