मुझे असफलताएँ प्यारीं हैं

जो उत्कृष्ट मार्ग पर ले जाएँ 

वो विचलित धाराएं प्यारीं हैं


अवनमन भले कुंठित कर दे

अनथक प्रयास दिवाली है

धरती के मन अंचल कोमल में

उगने वाली तू हरियाली है

दृक् ढूंढ रहे हैं आश्वाशन 

है करना तुझको 

खुदसे खुदकी तैय्यारी है

मुझे असफलताएं प्यारीं हैं.........

बालेन्द्र शर्मा