बादलों में छुप गया है चाँद मेरा
ख़्यालों में छा गया है एक अँधेरा
लालसा है एकचित्त उसे देखने की
मन,हाजिरी उसकी करे शीतल मेरा
बादलों में छुप गया.....
बालेन्द्र शर्मा


बादलों में छुप गया है चाँद मेरा
ख़्यालों में छा गया है एक अँधेरा
लालसा है एकचित्त उसे देखने की
मन,हाजिरी उसकी करे शीतल मेरा
बादलों में छुप गया.....
बालेन्द्र शर्मा