हाँ मैं मजदूर हूँ
पर मैं नहीं मजबूर हूँ
बेंचा है धूप में
खुद की मेहनत और मन
मन के बुरे पाप से
अभी बहुत दूर हूँ
हाँ मैं मजदूर हूँ
पर मैं नहीं......
हाँ मैं मजदूर हूँ
ऊँची खड़ी इमारतों कामैं गुरुर हूँ
है दर-बदर की ठोकरें
इस जिंदगी की गुलशन
पेट से भूखा हूँ लेकिन
मेहनत से भरपूर हूँ
हाँ मैं मजदूर हूँ
पर मैं नहीं......
बालेन्द्र शर्मा


