मैं अब शायर नही रहा,
मुझे आशिकी करना है
महज चन्द अल्फ़ाज़ उनके नाम के
मैं लिख नहीं सकता
मुझे दूर की ख़्वाबों वाली मोहोब्बत नही
बेशुमार दिल्लगी
पास की करना है
मैं शायर नही रहा......
बालेन्द्र शर्मा


मैं अब शायर नही रहा,
मुझे आशिकी करना है
महज चन्द अल्फ़ाज़ उनके नाम के
मैं लिख नहीं सकता
मुझे दूर की ख़्वाबों वाली मोहोब्बत नही
बेशुमार दिल्लगी
पास की करना है
मैं शायर नही रहा......
बालेन्द्र शर्मा