माइग्रेंट्स

रो रही होगी कहीं पर

जुगनू सी आशा किरण

वो भयभीत है,'सब' देखकर

न हो पराजय घर का रण

मैं जीत लूंगा शत्रु को


जो,सन्ताप का कारण हुआ


पर हारना भी तय समझलो


जब द्वन्द अपनों में हुआ


यह द्वन्द मेरे राष्ट्र के अंदर

बड़ा ही चल रहा है

समाधान पर चर्चा नहीं,बस

सत्ता का लालच पल रहा है

बालेन्द्र शर्मा