खबर दिल की और ख़्वाब की दोनों दिलों को है

न स्वीकार करना चाहते प्यार की मुश्किलों को हैं

वक्त ने कर दी ख़ता निगाहों को मिलाकरके

अब सामना दोनों का,प्यार के बुजदिलों से है

बालेन्द्र शर्मा