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कर्म


लड़ रहे हों जंग तब क्या मौत और क्या जिंदगी है

चाहे स्वयं यमराज आएं कर्म अपना बंदगी है

रक्त जिसकी है रगों में धर्म और निज त्याग का

पीछे हटें और रण को त्यागें,ये दिमागी गंदगी है

— बालेंद्र शर्मा "अनंत"
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