लड़ रहे हों जंग तब क्या मौत और क्या जिंदगी हैचाहे स्वयं यमराज आएं कर्म अपना बंदगी हैरक्त जिसकी है रगों में धर्म और निज त्याग कापीछे हटें और रण को त्यागें,ये दिमागी गंदगी है
लड़ रहे हों जंग तब क्या मौत और क्या जिंदगी है
चाहे स्वयं यमराज आएं कर्म अपना बंदगी है
रक्त जिसकी है रगों में धर्म और निज त्याग का
पीछे हटें और रण को त्यागें,ये दिमागी गंदगी है