वक्त का क्या है गुज़र जाएगा
शाम होते होते कल का,नशा उतर जायेगा
मगर इश्क़ किया है निभाना तो पड़ेगा ही
शाम को और पीलेंगे
...... वो मयखाना किधर जायेगा
बालेन्द्र शर्मा


वक्त का क्या है गुज़र जाएगा
शाम होते होते कल का,नशा उतर जायेगा
मगर इश्क़ किया है निभाना तो पड़ेगा ही
शाम को और पीलेंगे
...... वो मयखाना किधर जायेगा
बालेन्द्र शर्मा