वो हुस्न भरी सन्दूकें हैं

खुलना उनको मंजूर नहीं

हम कांटेवन के शहजादे

बिन चुभने के दस्तूर नहीं

सुन हूर परी ओ नूर परी

बेचैनी हमको मंजूर नहीं

तुम इश्क़ करो

हम प्यार करें

उल्फत में डूबी नजरों का

यूँ ख़ालीपन मंजूर नहीं

वो हुस्न भरी सन्दूकें.....

बालेन्द्र शर्मा