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द्वन्द


है द्वन्द मन मेंसम हिमालय

खण्डित अखण्डितमन के शिवालय

रिश्ते हुए अबकागजी हैं

भूखे पड़ेखुद भोजनालय

— बालेन्द्र शर्मा
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