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छिपी मोहोब्बत


जलजले तूफान होंगे और कुछ नही होगामहज रुठने से तेरेदिल में सुकूँ सचमुच नही होगातुम फिरोतियां देकर चिरागों को बुझा देनादिए की रौशनी में छुपकर मोहोब्बतये हमसे नही होगाजलजले तूफान होंगे....

— बालेन्द्र शर्मा
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