बिना तेरे तुझे मैं ढूढ़ लूँ
ये हो नहीं सकता
तुम्हारी शक्ल का हमशक्ल
मन में छिप गया मेरे
सोचता हूँ गुजारिश की मगर वो
गुम न हो जाएँ
निकल जाए कहीं दिल से मेरे
अकेले हम न हों जाएँ
तुम्हारे पास होने का सुक़ून
दिख नही सकता
तुम्हारे बिन विचारों कल्पना को
मैं लिख नहीं सकता
बालेन्द्र शर्मा


