जिसने जनम लिया है जाना तो उसका तय है
फिर डर रहा क्यूँ सत्व से ये तो जिंदगी का भय है
हार का भय न है मुझको,मेरी जीत का दामन बड़ा है
हार कर जीता है जो अंतिम समय तक खुद लड़ा है
जीत को कर ले सुनिश्चित बस यही तेरी विजय है
जिसने जनम लिया है ,जाना तो उसका तय है
गर लक्ष्य तेरा है अटल, अटल है तेरी साधना
बन राष्ट्र का प्रकाशपुंज,जगा राष्ट्रीयता की भावना
है साहस तेरे विचार में तो तेरा"अटल" अजय है
जिसने जनम लिया है जाना तो उसका तय है...
भर ली उड़ान जिंदगी की, फिर आँखें तेरी क्यूँ नम हैं
चल छोड़कर कुछ पल याद कर ,जिसमे बचपन जवानी और हम हैं
खुद को तत्व में विलीन कर बस यही नया उदय है
जिसने जनम लिया है जाना तो उसका तय है
फिर डर रहा क्यूँ सत्व से ये तो जिंदगी का भय है।
बालेंद्र शर्मा


