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अहसास


अभी जिन्दा हूँ,बस मुझे तेरे साथ रहने देहकीक़त है हमारी दूरियां,कुछ जिंदा अहसास रहने दे

मेरा दामन जो थोडा नम है,तेरी फुरकत की निशानी हैमुझे दफ़्न न कर भूलकर,कुछ इतिहास रहने दे

— बालेन्द्र शर्मा
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