सत्ता वाले भी अभी,अपने सिंघासनों में चूर हैं
लुट गयी अस्मत यहां जो आबरू की नूर है
शिश्कियां हैं भर रहीं लहरों से लड़ती कश्तियाँ
दे दिया सिंघासन जिन्हें उन्हें लुटती न दिखतीं बस्तियां
अब बस्तियों को छोड़ डूबती कश्तियों में आना पड़ेगा
चीर कर लहरों को,खुद के ज्वार को जगाना पड़ेगा
भारत माता की जय
बालेन्द्र शर्मा

