वो जो विचारों की डकार हमें आती है न!


उन विचारों मे भी खुदको खोजते जाते हैं हम।


उन विचारों से बातें करते हैं

उन्ही को प्रश्न बनाते हैं, उन्हीं को उत्तर।


उन्ही में रंग भरते हैं

और फिर मन की किसी पेटी के साथ दफन कर देते हैं!

वो पेटी बार-बार खुल जाती है।

तो मन को पक्का कर लेते हैं हम

ऐसे ही बातें करते हम,

उन्ही में खोए हों शायद वो भी

हम तुम…