भाई को गुरुर था उसपर,

भाई को था उसपर नाज।

सोचा नहीं उसने क्षणिक भी,

गिरा दिया भाई का सिरताज।

मुरझा गए हैं अब वे,

जो कभी फूलों से खिलते थे।

बातें नहीं करना चाहते हैं किसी से,

वे..जो हर रोज सभी से मिलते थे।

समझाने वालों ने समझाया,

क्यों होते हो व्यर्थ में चिंतित।

अमूमन, ये पीड़ा हैं सभी घरों में,

कहो, किसका घर हैं इस रोग से वंचित।

"कल कोई और था, आज वहाँ तू है,

कल कोई और होगा, आज जहाँ तू है"

वक़्त बड़ा बलवान हैं,

एक जगह ठहरता नहीं।

सोच-सोच ये सब बातें,

मत कर अपने मन को क्रंदित।

      ➖【 भाग - 2】