मैं दर्द -ए -दिल लिखूँ
और आह न निकले
ये मुमकिन नहीं है दोस्त।
ये दास्ताँ तेरी है मेरी नहीं है दोस्त ।
अब फ़रिश्ते भी तुझको आजमाएंगे
कुछ गैर भी नज़रे मिलाएंगे
ये मोहब्बत सबको मुकम्मल नहीं है दोस्त
ये दास्ताँ तेरी है मेरी नहीं है दोस्त।
तू भटके उसकी गली में कुछ नहीं कुछ नहीं
वो गुजरे तेरी गली से अफसाना हो जाए
जिसके पीछे पड़ा था तू बचपन से
वो अब बीबी मेरी है तेरी नहीं है दोस्त
ये दास्ताँ तेरी है मेरी नहीं है दोस्त।
बाबूप्रेम अमर
मित्रता दिवस की शुभकामनायें मित्रों


