तेरी जब याद आये तो , रो लेना ही बेहतर है.. 

तुझे पाने की हसरत में , न कोइ बर्कत है.. 

तेरा हर बात में यू मुकरना , फ़िर भी अच्छा है.. 

मुझे बस देखले मुड़कर , तुझे इतनी तो फ़ुर्सत है..


तेरे मिलने की हसरत है, तुझे पाने की मन्नत है.

सुना है हमने लोगो से , तेरी बाहो में जन्नत है.. 

तेरे दीदार में ही वो फ़साने याद आते है..

तेरे आने की आहट थी , तेरे जाने की खिन्नत है ।

     - बाबू प्रेम अमर