न जाने क्यों मैं रोया हूँ, न जाने क्यों तु रोई है.
तुझे देखू ये बेचैनी, बाकी तन्हाई है..
तु आ ही जाये तो इसमें, मेरी भलाई है..
तेरे दीदार की खातिर, ये दुनिया तो भुलाई है..
तु आ ही जाये तो इसमें, मेरी भलाई है..
तेरे दीदार की खातिर, ये दुनिया तो भुलाई है..
तु आकर भी गले न लग, तो इसमे बेवफाई है..
तु आकर के गले लग जा, ये दुनिया तो पराई है..
-बाबू प्रेम अमर


