हे पुत्र दिवाकर जननायकहो दुश्मन के तुम कुल घालकहे क्रांति दूत हे अग्राहकहे भारत के " मंगल " कारकधरणी पर अवतरण दोबारा होजय जय फिर गान तुम्हारा हो ।
हे पुत्र दिवाकर जननायकहो दुश्मन के तुम कुल घालक
हे क्रांति दूत हे अग्राहकहे भारत के " मंगल " कारक
धरणी पर अवतरण दोबारा होजय जय फिर गान तुम्हारा हो ।