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मंगल पाण्डे


हे पुत्र दिवाकर जननायकहो दुश्मन के तुम कुल घालक

हे क्रांति दूत हे अग्राहकहे भारत के " मंगल " कारक

धरणी पर अवतरण दोबारा होजय जय फिर गान तुम्हारा हो ।

— बाबू प्रेम अमर
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