हे पुत्र दिवाकर जननायक

हो दुश्मन के तुम कुल घालक

हे क्रांति दूत हे अग्राहक

हे भारत के " मंगल " कारक

धरणी पर अवतरण दोबारा हो

जय जय फिर गान तुम्हारा हो ।

      - बाबू प्रेम अमर