प्रभु तोरे वन्दन से पहिले

शीश झूकाऊँ इन चरणों में ।

प्रथम प्रणाम मातु को मोरा

जिन्ह मोहि जन्म दियो धरणी में ।

फिर मैं सुमिरौ भारत मांँ को

जिन्ह मोहि पाल्यो है गोदी में ।

फिर मैं चरण गहौ गुरुजन के

जिन्ह उजिआर कियो बुद्धि में ।

      गुरुपूर्णिमा की हृदय तल से शुभकामनाये

        ~ बाबू प्रेम अमर